इस दिल से निकली आह को कोई समझे...
इस रूह को ना मिलने वाली पनाह को कोई समझे ...
ख्वाब पुरे देखने से पहेले ही आँख खुल जाती है ...
अधूरे ख्वाब पुरे करते-करते नींद आजाती है ...
ज़िंदगी में हमेशा कामयाब ना हो सके तो क्या ..
ज़िंदगी में हमेशा मुस्कुरा ना सके तो क्या ...
खुदा ने दी है एक ज़िंदगी जीने के लिए ...
क्यों ना जीभर के जिए हर पल सारी ज़िंदगी के लिए ...
Thank you Surinder :)
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